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कविता (क्षणिका)
सियासत
सियासत
राजकपूर राजपूत
मई 29, 2020
जो आदमी अभी तक
गहरी उदासीनतओं में
डूबी हुई थी
अचानक
सियासत की बातों से
आंदोलित हो गया
जैसे उसे कुछ मिल गया हो
और चले गए पीछे पीछे
अपने हुक्मरानों के
कविता (क्षणिका)
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1 टिप्पणियाँ
Unknown
13 जून 2020 को 6:01 pm बजे
Bahut badhiya
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Bahut badhiya
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