फूल खिले हैं चारों ओर
भटक ना जाना कहीं और

अपनी तलाश में चिड़िया प्यारी
निकल गई है कहीं और

सफलता उसे ही मिलती है
जो ध्यान ना लगाएं कहीं और

काम ना आएगी सूरज की रौशनी
जब देखें तेरी ऑ॑खें कहीं और
 
दुनिया बहुत बूरी चीज़ है "राज"
चलो ! चलते हैं हम कहीं और
---राजकपूर राजपूत''राज''