Home
Kavita
Kahani
Gazal
Geet
Lekh
Shayari
Upnyas
मुख्यपृष्ठ
कविता (मुक्तक)
आज़मा कर देखते एक बार
आज़मा कर देखते एक बार
राजकपूर राजपूत
जुलाई 27, 2020
तुम, मुझे आज़मा कर देखते एक बार
आता मैं लौटकर आवाज देते एक बार
शिकायत दबी हो तो नफरत बन जाती है
मेरी नादानियों को खुलकर कहते एक बार
ख्याल आया तेरा यूॅ॑ ही मुस्कुरा कर चले जाने से
तेरे सीने में इश्क़ था तो मुझे कहते एक बार
---राजकपूर राजपूत''राज''
कविता (मुक्तक)
Reactions
एक टिप्पणी भेजें
0 टिप्पणियाँ
Most Popular
Search This Blog
संपर्क फ़ॉर्म
नाम
ईमेल
*
संदेश
*
Popular Posts
Contact form
0 टिप्पणियाँ